कुछ मनुष्य अग्नि पर नंगे पैर कैसे चलते हैं?
अग्नि पर चलने की कला के प्रदर्शन के समय पैर का आग से संपर्क बहुत कम अवधि के लिए होता है और पैर के तलवे मोटे, आर्द्र, शीतल तथा धूल से विलेपित होते हैं। अग्नि से पैर का संपर्क लगभग 3 सेकन्ड होता है। जब कोई गरम वस्तु त्वचा पर अधिक समय के लिए लगाई जाती है तो ऊष्मा त्वचा की सतह से गहरे ऊतकों में प्रवाहित हो जाती है। लगभग 50 सें.ग्रे. के क्रांतिक स्तर पर एक घाव हो जाता है। गहरे ऊतकों से द्रव रिसकर त्वचा के नीचे जले हुए ऊपर वाली मृत परत के नीचे एकत्र होने से छाला बन जाता है। आग पर चलने से गहरे ऊतकों के तापमान में वृद्धि न होने के कारण छाले नहीं बनते, क्योंकि आवश्यक क्रान्तिक अवधि की अपेक्षा सम्पर्क अवधि अत्यन्त कम होती है। हुक्के की चिलम में लाल अंगारे को हाथ से रखने से भी छाला नहीं बनता। कुछ लोग आग के जलते हुए गोलक को मुँह में रख लेते हैं और उन्हें कोई क्षति नहीं होती। यह मुँह में उपस्थित लार की आर्द्रता, कार्बन डाइऑक्साइड, पूर्णतः खुरदरी आन्तर परत के मुँह में होने और पुनरावृत्ति-निष्पादन के कारण होता है।